Friday, March 16, 2007

हिंदी ब्लागरों से कुछ मन की बात

हिंदी ब्लोगिंग का क्षेत्र कितना महत्व्पूर्ण है यह तो मुझे इस दुनिया में पहला कदम रख कर ही पता चल गया था. मैं इस दुनिया में बहुत पुराना नही हूं पर जितना भी ज्ञान मुझे थोडे समय में हुआ है उसके आधार पर मैं यह कह सकता हूं कि यदि इस माध्यम का सही से और विवेकपूर्ण तरीके से प्रयोग किया जाए तो भविष्य मे यह न केवल अभिव्यक्ति का ब्लकि देश की राजनीती, समाज और जनचेतना का एक उम्दा स्रोत जरूर बन जाएगा. आज हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर इस बात की उमीद को और बल देती है. परंतु हर माध्यम का सदुपयोग और दुरउपयोग दौनों होते हैं. पिछले दिनों मोहल्ले से जैसे स्वर सुनाई दिये, क्या वैसे स्वर सुखदाई है. आज हम सब (जो आगे बढने की कोशिश मे लगे हैं) तरक्की चाहते है. सुखद जीवन चाह्ते है. प्रतिस्पर्दा तो करते हैं पर मरने मारने की दुश्मनी पालने वाले मुझे लगता है कम हो गये हैं. अब लोग दूसरे को नस्ट करने की बजाय आपना काम बनता ज्यादा देखना चाहते है. यानी हमें ज्यदा मिल जाए यह भाव तो होता है पर दूसरे को बिलकुल ना मिले शायद ऐसा अब नही है. जिन कंपनियों मे पहले जम कर खून चुसाई होती थी उन्ही कंपनियों मे अब कर्मचारियो के वेलफेयर की बात होती है. बात यह कहना चाहता हूं की एक दूसरे पर विचार थोपने की बजाय एक दूसरे की बात में से तथ्य तलाशने का प्रयास होना चाहिए. ब्लोग की हिन्दी दुनिया पूरी दुनिया को बहुत कुछ देने वाली है. इस दुनिया को धर्मों, पंथों, वाद, पोंगा पंथियों से बचा कर रखना है. देखना एक दिन यहां एसी दुनिया खडी होगी जहां आकर आपको एसा मजा आएगा जेसे पत्नी के हाथ से खाना खाने मे आता है, मां के दुलार मे आता है, बाप के छाती लगाने से आता है, और भाई बहन के प्यार मे आता है. कुछ अर्ज और करना चाह्ता हूं ब्लाग पर आने वालों से. मैं देखता हूं ब्लाग पर आने वालों की संख्या तो बढती जाती है पर टिप्पणी नही बढती. हम नियम बना ले कि जिस ब्लाग पर भी जाएंगे वहां अपनी उपस्थिती जरूर दर्ज करें भले ही यदि पहली लाईन पढते ही मजा कखराब हो जाए और पढने का मन न करे तो लिख दे ' मजा नही आया, जा रहा हू.' पर आवक दर्ज होनी चाहिये. कई बार पढ कर एसा भी लगता है कि लेखक फलां विषय पर अच्छी जानकारी रखता होगा तो उस से उस विषय पर लिखने को भी कहा जा सकता है. मुझे लगता है एसा करने से इस नई दुनिया में प्रेम पनपेगा. मुखौटे लगा कर आने वालों का भी स्वागत होना चाहिये. मुखौटों मे बुराई नहीं होती मुखौटे आदमी को निडर बनाते है. क्र्प्या अपनी राय जरूर दें ...

11 comments:

Jitendra Chaudhary said...

(roman mein likhne ke liye maafi chahoonga)

Yogesh bhai aapke vichar pasand aaye. Sabko saath lekar chalne ko hi dhyey hona chahiye.

Mohalla vishay par kaafi kutch kaha ja chuka hai, isliye dobara yahan discussion nahi shuru hona chahiye.

Tippaniyan ko jaroorat, har ubharte huye chithhakar ko hoti hai, mera sabhi chithhakaron se nivedan hai ki Jis bhi blog par visit karein, tippaniyan jaroor karein, Khas kar naye chithhakaron par to jaroor, kyonki yahin hindi chithhakari ka bhavishya honge.

संजय बेंगाणी said...

टिप्पणी को लेकर भी आपके विचार पसन्द आए. कुछ लोग मात्र उत्साह वर्धन करने के लिए ही टिप्पीयाते रहे है. आशा है आप भी अनुसरण करगें.

मुखोटों से किसी को कोई आपत्ति नहीं है, लगता है इस बारे में भ्रम फैला जो मजबुत होता गया.

masijeevi said...

आपके विचार विशेषकर संतुलन के लिए, प्रशंसनीय हैं

संजीत त्रिपाठी said...

बढ़िया विचार हैं आपके।
शुभकामनाएं

. said...

पढ कर अच्छा लगा

बढ़िया विचार हैं ।
मैरी शुभकामनाऐ आपके साथ हैं ।

सागर चन्द नाहर said...

ऊंचे विचार है आपके, पढ़ कर अच्छा लगा। :)
कितनी टिप्पणियाँ हो गई ब तक योगेश जी? :)

उडन तश्तरी said...

उत्तम विचार, योगेश भाई!! अच्छा लगा पढ़कर.

notepad said...

बढिया है विचार आपके कि आवक दर्ज होनी चाहिये.

अनूप शुक्ला said...

आपके विचार उत्तम हैं!

राजीव रंजन प्रसाद said...

योगेश जी मैं तो आरंभ से ही आपके प्रसंशको में हूँ..संभवत: जब आपकी पहली रचना पढी थी (नुक्कड नाटक) तब से ही। यह बात सत्य हैं कि रचना पर चर्चा आवश्यक है, टिप्पणी का महत्व है। मैं निश्चित ही आलस्य त्यागने के लिये प्रेरित हुआ हूँ। मन ही मन की गयी प्रसंशा रचनाकार तक पहुचे एसी टेलीपेथी तो असंभव है..

मोहिन्दर कुमार said...

Baat wahi jo dil mein teer si chubh jaaye or kutch sochane ko majboor kare........jo yeh aap ki lekhani mein hai.....dhaar banaaye rakhiye...

 
blogvani